सहारनपुर : सहारनपुर के कस्बा बेहट की इंदिरा कॉलोनी में अफरातफरी का माहौल बना हुआ है। सिंचाई विभाग के अधिकारी पुलिस और प्रशासनिक टीम ने कॉलोनी के सेंकड़ों घरों को न सिर्फ अवैध घोषित किया है बल्कि घरों को ध्वस्त करने की तैयारी कर ली है। इतना ही नहीं कई घरों को चिन्हित कर क्रॉस के निशान लगा दिए हैं। हालांकि 70 परिवारों ने हाइकोर्ट से स्टे ले लिया है। जिससे उन परिवारों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन बाकी घरों को चिन्हित कर तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है। जिससे कॉलोनी वासियों को अपने बीवी बच्चों की चिंता सताने लगी है। पीड़ित लोग प्रशासन से इन्साफ की गुहार लगा रहे हैं।

आपको बता दें कि सोमवार की शाम सिंचाई विभाग और प्रशानिक अधिकारी इंदिरा कॉलोनी पहुंचे जहां उन्होंने कॉलोनी वासियों को कॉलोनी खाली करने के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया। कॉलोनी के ज़िम्मेदार लोगों ने अदालती आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई रोकने की माँग की। लेकिन अधिकारियों ने इनकार कर दिया और मकानों पर निशान लगाना शुरू कर दिया। अधिकारियों के निर्देश पर चिन्हित किए गए घरों पर रेड क्रॉस के निशान लगाए।
सोमवार को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता प्रवीण जोशिया, डीआरओ विशेष सैनी, सहायक अभियंता पूजा सैनी, जेई अशोक कुमार, ज़िला मजिस्ट्रेट तौफ़ीक़ और पूरा राजस्व अमला पुलिस बल के साथ कोतवाली बेहट पहुँचे और गर्ल्स डिग्री कॉलेज के पास पहुँचे। उन्होंने लाउड स्पीकर से अनाउंस किया कि वे तीन दिन के भीतर इंदिरा कॉलोनी और सिंचाई विभाग की ज़मीन पर बने मकानों को खाली कर दें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तीन दिन के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो विभाग ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर देगा।
इस बीच कॉलोनी के पदाधिकारियों, जिनमें कामरेड शौकत, सरफराज खान गुड्डू, अतहर पीरजी, हाजी फरहाद ने अधिकारियों को अदालत के स्टे ऑर्डर की एक प्रति दिखाई और कार्यवाही रोकने का आग्रह किया। अधिकारियों ने अदालत के आदेश की अनदेखी करते हुए घरों पर निशान लगाने का काम जारी रखा। एसडीएम बेहट मानवेंद्र सिंह भी मौके पर पहुँच गए। चूँकि सपा विधायक उमर अली खान बाहर थे इसलिए उनके प्रतिनिधि फैजान फैज पहुँचे और अधिकारियों से बात की। मुकदमा दायर करने और स्टे लाने वाले सरफराज खान का दावा है कि यह ज़मीन खसरा संख्या 729 में स्थित सिंचाई विभाग की जो खाली पडी हुई है। उनके पास उस ज़मीन के दस्तावेज़ भी थे जहाँ कॉलोनी वासी रहते हैं। लेकिन वे दस्तावेज़ 1999 की बाढ़ में नष्ट हो गए थे।
कॉलोनीवासियों का आरोप है कि अदालत के स्टे आदेश के बावजूद उन्हें परेशान किया जा रहा है। वे इस कार्रवाई के संबंध में अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। इस मामले में उप राजस्व अधिकारी विशेष सैनी का कहना है कि सिंचाई विभाग की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा करने वालों को पहले नोटिस दिए गए थे और मुक़दमे दायर किए गए थे। जिसके बाद 70 लोगों ने कोर्ट जाकर स्टे ले लिया था। 70 घरों को छोड़कर बाकी घरों को चिन्हित किया जा रहा है और तीन दिन के अंदर खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है। बिजली कनेक्शन काटने और पेयजल आपूर्ति बंद करने के लिए संबंधित विभागों को पत्र भी भेज दिए गए हैं। तीन दिन बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की जायेगी।

